8th Pay Commission Salary List – केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इस समय सबसे ज्यादा चर्चा 8वें वेतन आयोग को लेकर हो रही है। जनवरी 2025 में सरकार ने इसके गठन और टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए, तभी से लाखों कर्मचारी यह जानने को उत्सुक हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। करीब 50 लाख कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनभोगी इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। माना जा रहा है कि यह आयोग जनवरी 2026 से लागू हो सकता है और अगले 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और इसका रोल
वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम चीज होती है। आसान भाषा में कहें तो यह एक गुणांक है, जिससे पुराने मूल वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। जैसे अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.5 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी सीधे 50,000 रुपये हो जाएगी। यही वजह है कि कर्मचारी फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर रखते हैं, क्योंकि इससे ही तय होता है कि असली फायदा कितना मिलेगा।
फिटमेंट फैक्टर कैसे तय किया जाता है
फिटमेंट फैक्टर कोई एक फॉर्मूला लगाकर तय नहीं होता। वेतन आयोग महंगाई दर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, रोजमर्रा के खर्च, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च, निजी सेक्टर में सैलरी ट्रेंड और सरकार की आर्थिक स्थिति जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखता है। आयोग यह भी देखता है कि कर्मचारियों का जीवन स्तर बेहतर कैसे हो और साथ ही सरकार के बजट पर जरूरत से ज्यादा बोझ भी न पड़े। इन सब बातों का संतुलन बनाकर ही फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की जाती है।
पिछले वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर का अनुभव
अगर पुराने वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार फिटमेंट फैक्टर अलग रहा है। छठे वेतन आयोग में शुरुआत में कम गुणांक सुझाया गया था, लेकिन बाद में महंगाई भत्ते को जोड़कर इसमें बदलाव किया गया। सातवें वेतन आयोग में 2.57 का एकसमान फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिली। इसी आयोग में पे मैट्रिक्स सिस्टम लाया गया, जिससे वेतन संरचना ज्यादा साफ और समझने में आसान हो गई।
8वें वेतन आयोग में संभावित फिटमेंट फैक्टर
अब बात करते हैं 8वें वेतन आयोग की। अभी तक सरकार ने कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर घोषित नहीं किया है, लेकिन चर्चाओं और अनुमानों का दौर जारी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई और खर्च को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर कम से कम 2 से ऊपर होना चाहिए। कुछ विशेषज्ञ इसे 2.13 के आसपास मान रहे हैं, जबकि कुछ का अनुमान है कि यह 2.28 या उससे ज्यादा भी हो सकता है। मौजूदा डीए करीब 58 प्रतिशत है, जो 2026 तक 65–70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, इसी आधार पर ये अनुमान लगाए जा रहे हैं।
फिटमेंट फैक्टर से सैलरी और पेंशन पर असर
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सीधा फायदा बेसिक सैलरी पर पड़ता है और उसी के साथ सभी भत्ते भी बढ़ जाते हैं। अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी 36,000 रुपये हो सकती है। इसी तरह 25,000 रुपये बेसिक वालों की सैलरी 50,000 और 50,000 वालों की 1 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। पेंशनभोगियों के लिए भी यह बदलाव फायदेमंद रहेगा, क्योंकि पेंशन की गणना भी अंतिम बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। न्यूनतम पेंशन में भी अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच संतुलन की चुनौती
वेतन बढ़ोतरी से जहां कर्मचारियों को राहत मिलती है, वहीं सरकार पर इसका बड़ा वित्तीय बोझ भी पड़ता है। अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग से सरकार पर सालाना ढाई से साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। यही वजह है कि सरकार और वेतन आयोग दोनों को कर्मचारियों की मांगों और देश की आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन बनाना होता है।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है
कर्मचारियों को उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग उनकी वास्तविक जरूरतों को समझेगा और महंगाई के हिसाब से सैलरी में ठोस बढ़ोतरी करेगा। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। अगर सब कुछ तय समय पर रहा, तो जनवरी 2026 से नई वेतन संरचना लागू हो सकती है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, विशेषज्ञों के अनुमानों और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी किसी भी तरह की अंतिम या आधिकारिक घोषणा अभी सरकार द्वारा नहीं की गई है। यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर देखें।