सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! अब चेक बाउंस किया तो सीधे जेल और जुर्माना तय Cheque Bounce Rule

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! अब चेक बाउंस किया तो सीधे जेल और जुर्माना तय Cheque Bounce Rule

Cheque Bounce Rule – आज के दौर में ऑनलाइन पेमेंट और UPI के ज़माने में भी कई लोग अभी भी चेक के जरिए पेमेंट करना पसंद करते हैं, खासकर व्यापार, प्रॉपर्टी डील या बड़ी रकम के लेन-देन में। लेकिन जब वही चेक बाउंस हो जाता है, तो लेने वाले की मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। न सिर्फ पैसे की दिक्कत होती है, बल्कि कोर्ट-कचहरी का झंझट भी बढ़ जाता है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं।

अब चेक बाउंस को माना जाएगा गंभीर अपराध

पहले चेक बाउंस के केस में आरोपी बार-बार तारीखें बढ़वाता रहता था और सालों तक केस लटका रहता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। अब चेक बाउंस के मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है और इसके लिए 2 साल तक की जेल और चेक अमाउंट का दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर कोई बार-बार चेक बाउंस करता है तो उसका बैंक अकाउंट भी अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाएगा।

तेजी से निपटेंगे केस, बनेगी स्पेशल कोर्ट

इन मामलों की सुनवाई अब स्पेशल कोर्ट्स में होगी, जो सिर्फ चेक बाउंस मामलों को ही हैंडल करेंगी। इससे पीड़ित को समय पर न्याय मिलेगा और केस सालों नहीं खिंचेंगे। साथ ही, अब केस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फाइल किए जा सकेंगे। यानी आप ऑनलाइन ही केस दर्ज कर सकते हैं और उसकी पूरी ट्रैकिंग भी ऑनलाइन हो सकेगी। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो गई है।

CIBIL स्कोर भी होगा प्रभावित, मिलेगा SMS अलर्ट

अब अगर किसी का चेक बाउंस होता है, तो उसका असर सीधे उनके CIBIL स्कोर पर पड़ेगा। यानी भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में दिक्कत हो सकती है। इतना ही नहीं, चेक बाउंस होते ही दोनों पक्षों को SMS या ईमेल के जरिए 24 घंटे के अंदर जानकारी भेज दी जाएगी, जिससे किसी को भी बाद में कहने का मौका नहीं मिलेगा कि उन्हें जानकारी नहीं थी।

गलती बैंक की तो नहीं मिलेगी सजा

अगर चेक बाउंस बैंक की तकनीकी गलती से हुआ है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में न तो सजा मिलेगी और न ही जुर्माना। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दोषी वही माना जाएगा, जिसने जानबूझकर या लापरवाही से चेक बाउंस कराया हो। बैंक की गड़बड़ी होने पर व्यक्ति को राहत दी जाएगी।

अब सभी बैंकों में एक जैसी पेनल्टी

पहले अलग-अलग बैंकों में चेक बाउंस पर अलग-अलग पेनल्टी लगती थी, जिससे लोगों को भ्रम होता था। अब यह नियम बदल गया है। देश के सभी बैंकों में एक जैसी पेनल्टी लागू कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और एकरूपता आएगी। इससे न सिर्फ ग्राहकों को फायदा होगा बल्कि बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत होगा।

क्यों जरूरी थे ये नए नियम?

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पिछले कई सालों में चेक बाउंस के लाखों केस कोर्ट में लंबित हैं, जिससे न्याय प्रणाली पर भारी बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा चेक बाउंस के कारण छोटे व्यापारी, किसान और आम लोग आर्थिक रूप से बहुत नुकसान झेलते हैं। नए नियमों से न सिर्फ न्याय जल्दी मिलेगा बल्कि लेन-देन का भरोसा भी बढ़ेगा।

3 बार चेक बाउंस तो अकाउंट फ्रीज

अगर कोई व्यक्ति या संस्था लगातार 3 बार चेक बाउंस करता है तो उसका बैंक अकाउंट अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाएगा। यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि लोग बार-बार गलती न दोहराएं और भुगतान को लेकर गंभीर रहें। इससे फाइनेंशियल सिस्टम पर भरोसा बना रहेगा।

चेक बाउंस से कैसे बचें?

इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप चेक देने से पहले अपने अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस रखें। इसके अलावा चेक पर सही तारीख, साफ हस्ताक्षर और सभी डिटेल्स भरें। पुराना या खराब हालत वाला चेक देने से बचें। चेक देने से पहले एक बार अच्छे से जांच लें और समय पर भुगतान करें।

FAQs:

1. क्या चेक बाउंस का केस अब ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है?

हां, अब आप अपने शहर के अनुसार संबंधित पोर्टल पर जाकर डिजिटल रूप से केस फाइल कर सकते हैं और उसकी स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।

2. क्या CIBIL स्कोर पर चेक बाउंस का असर होगा?

बिलकुल। अगर आपका चेक बाउंस होता है, तो उसका रिकॉर्ड सीधा CIBIL के पास जाएगा, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है।

3. कितनी बार चेक बाउंस होने पर अकाउंट फ्रीज होगा?

अगर एक ही व्यक्ति का चेक तीन बार बाउंस होता है, तो उसका अकाउंट अस्थायी रूप से फ्रीज किया जा सकता है और आगे की जांच शुरू होगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दिए गए नियम और दिशा-निर्देश सुप्रीम कोर्ट और संबंधित सरकारी विभागों द्वारा जारी किए गए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू हो चुके हैं। किसी कानूनी सलाह के लिए आप किसी विशेषज्ञ से संपर्क जरूर करें।

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